शब्दों की शक्ति
आज मैंने शब्दों की शक्ति की महिमा देखी। मैंने देखा दो समूह आपस में बेहद हिंसात्मक तरीके से लड़ रहे थे। अगले ही पल एक संत आत्मा बुजुर्ग वहां आए और उन्होंने कुछ ऐसा कहा कि दोनों समूह शांत हो गए, और आपस में संतुष्ट हो गए। शब्द क्या नहीं कर सकते! शब्दों में बड़ी ताकत होती है। शब्द विचार हैं, शब्द हमारे विचार में हैं। जैसे हमारे विचार होंगे, हमारे शब्द भी वैसे ही होंगे। बार-बार संकल्पों को लेकर निराशा के भाव से पीड़ित लोग अक्सर कठोर रणनीति अपना लेते हैं। इस कारण वे स्वयं के शत्रु बन जाते हैं, इसे स्वयं के विकास में बाधा उत्पन्न होती है। ऐसे में इस प्रकार की परिस्थितियों से बचने के लिए हमें कठोर बनने के बजाय, शब्दों का प्रयोग कर लचीला बनना सीखें। सकारात्मक और रचनात्मक नीति हर विपरीत परिस्थितियों को सहज बना कर हमारी राह आसान बना देती है। यह बेहद कारगर नीति है। सकारात्मक शब्दों की ताकत को आज विश्व के कोने-कोने में महसूस किया जा सकता है। सकारात्मक सोच की रणनीति में यदि लचीले शब्द भी डाल दिए जाएं तो फिर ...