कोरोना की विदाई
एक रात जैसे ही मैं गहरे अचेतन मन में गई मैंने एक विचित्र आकृति वाले नन्हे जीव को मेरे घर की ओर आते देखा। वह भयावह लग रहा था। क्रोध से उसकी आंखें लाल हो रही थीं। वह मेरे समीप आकर खड़ा हो गया। मैंने सहमते हुए उससे पूछा -"कौन हो तुम?" "मैं कोरोना हूँ, मुझे कोविड-19 भी कहते हैं", उसने कहा। मैंने पूछा "तुम कहां से आए हो?" उसने कहा "मैं चीन से आया हूं" "यहां क्यों आए हो?" उसने कहा "मैं सभी मनुष्य को दंड देने आया हूं। इन्होंने प्रकृति को नष्ट किया है।" मैंने कहा "तुम यहां से चले जाओ मुझे डर लग रहा है।" उसने कहा "अब मैं तुम्हारे घर रहना चाहता हूं" "नहीं तुम मेरे घर नहीं रह सकते!" मैंने कहा । मेरे चारों ओर अंधेरा था। रात का सन्नाटा फैल रहा था। घबराहट के कारण मैं पसीने से तरबतर थी। उस कोरोना नाम के विचित्र जीव से बचने के लिए सहायता के लिए इधर-उधर देखने लगी। आज मैं बड़े संकट में फंसी थी। मैं किसी भी प्रकार से उस जीव को अपने घर नहीं आने देना चाहती थी। सहमते हुए मैं पीछे ...