हरितालिका तीज पर


हरितालिका तीज पर, मैं आई तेरे द्वार
सदा सुहागन रहूँ मैं, मां दे दो यह वरदान

सारी सखियां मंगल गातीं, आईं मेरे द्वार
मैं माटी की तुम्हें बनाऊं, खुद जाऊं बलिहारि

हरी चूड़ियां लाल चुनरिया, करके सोलह श्रंगार
श्रद्धा सुमन से पूजूं, चाहूं गौरा जैसा परिवार

हलवा पूरी मालपुए, व्यंजन लाऊं अपार
शिव गौरा का भोग लगाऊँ, बन जाऊँ पतिव्रता नार

झूला झूले मन मृदंग, मधुरम मधुरम मंगलाचार
रंग बिरंगे फूल-फूल से, खुशबू आए अपार

सदा सुहागन रहूं मैं, मां दे दो यह वरदान।।

--गीता सिंह 
   उत्तर प्रदेश 

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