आस


आज भी ननुआ के खेत को पानी नहीं मिल सका क्योंकि ट्यूबवेल केवल एक बड़े किसान के ही पास थी । तपती चिलचिलाती जून की गर्मी में पानी की किसे आवश्यकता न होती ?बड़े किसान राजाराम के यहां छोटे किसानों की लाइन लगी हुई थी ।ननुआ के पास था केवल दो बीघा खेत जिससे साल भर का खर्च चलाता, परिवार पालता था।

“आज पानी मिल गयौ का ?”ननुआ की पत्नी मंगला ने उत्सुकता से पूछा।

“नाय” ननुआ ने उदास हो बताया।

“दस दिनन तै खेत कू पानी नाय मिलौ है, खेत सूखै जाय रयौ ऐ।” मंगला लगभग रूआंसी हो बोली।

“आज पानी नाय मिलौ तौ गेहूं नाय बच पाबेंगे।” ननुआ मंगला की ओर देखकर बोला।

दोनों खेत के पास बैठकर आकाश की ओर देखने लगे शायद उन्हें अब एक ही आस थी।।

–गीता सिंह
खुर्जा, उत्तर प्रदेश

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