योग...एक अनुभूति, एक साधना

योग न धर्म से जुड़ा है न जाति से। इसे विशेष धर्म से जोड़ने वाले समझें कि योग एक शारीरिक अभ्यास है। विभिन्न योग मुद्राओं से शरीर को एक नई ऊर्जा मिलती है जो हमारी आत्मा को एक सर्वशक्तिमान ऊर्जा से जोड़ती है। जो भी शक्ति इस ब्रह्मांड को चला रही है उस से सीधा संपर्क योग से ही संभव है।
                      योग अभी नया-नया जन्मा शब्द नहीं है। हमारे शास्त्रों में इसका वर्णन दस हजार वर्ष से भी अधिक समय का है। वैदिक काल में अनेक ऋषि मुनि हुए हैं जो योग से पूर्णत्व को प्राप्त हुए थे। योग एक साधना है जो उम्र भर चलती है। योग एक यात्रा है, मूर्त से अमूर्त की ओर। आदि काल से ही हमारे देश में योग का प्रारूप देखने को मिलता है। हमारे प्रिय शिव, एक पूर्ण योगी रहे हैं। इस योग साधना से हमारे साधु-संत समाधि लेकर अपनी आत्मा द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान तक यात्रा कर आते थे। इसी योग साधना से उन्हें दिव्यदृष्टि प्राप्त होती थी। वह वर्तमान, भूत, भविष्य बता देते थे। इस योग का उल्लेख हमारे उपनिषद बृहदारण्यक में भी मिलता है। इनमें वेदमंत्र तथा प्राणायाम के अभ्यास का भी वर्णन है। योग हमारी प्राचीन धरोहर है। योग में शरीर की आंतरिक सफाई से लेकर मन-कर्म-वचन को पवित्र करने की अद्भुत शक्ति है। पवित्र पुस्तक गीता में भी योग का विशेष वर्णन है। इनमें मुख्य तीन प्रकार बताए गए हैं-
1)कर्मयोग
2)भक्ति योग 
3)ज्ञान योग 
        योग व्यायाम का एक ऐसा प्रभावशाली प्रकार है जिसके माध्यम से न केवल शरीर के अंगों में बल्कि मन मस्तिष्क और आत्मा में संतुलन बनाया जाता है। यही कारण है कि योग से शरीर की बीमारियों के अलावा मन के विकारों से भी मुक्ति पाई जा सकती है, और मनुष्य सौ वर्षों से ज्यादा का स्वस्थ जीवन पाता है।
              महर्षि पतंजलि को योग के पिता के रूप में माना जाता है। व्यापक रूप से पतंजलि औपचारिक योग दर्शन के संस्थापक माने जाते हैं। महर्षि पतंजलि के अनुसार मन की इच्छाओं का चंचल होने से रोकना ही योग है। महर्षि पतंजलि ने योग को आठ भागों में बांटा है, जिसे अष्टांग योग कहते हैं।
1) यम - सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, चोरी न करना आदि।  
2) नियम - अपने इष्ट का ध्यान, संतोष, स्वाध्याय, और शौच माने जाते हैं। 
3) आसन - विभिन्न योग मुद्राओं से शरीर को लचीला व निरोगी बनाना ही आसन है।
4) प्राणायाम - प्राणायाम में सांसों को वश में किया जाता है। प्राणायाम करने से आंतरिक शक्ति जागृत होती है। हमारी आत्मा शुद्ध होती है। मन पर विजय प्राप्त होती है।
5) प्रत्याहार - मन को बाहरी विषय वासना से हटाकर आंतरिक विषयों में लगाना ही प्रत्याहार है।
6) धारणा - दुनिया की प्रत्येक वस्तु को एक समान समझना, धारणा है।
7) ध्यान - ध्यान सबसे महत्वपूर्ण है। योग में इससे मन एकाग्रचित्त हो जाता है। जब कोई ध्यान में बैठता है तो उसे कुछ समय बाद एक बिंदु रूप में ज्योति दिखाई पड़ती है। फिर धीरे-धीरे वह तेज प्रकाश में बदल जाती है। और वह मनुष्य इस बाहरी दुनिया को छोड़कर अंदर की दुनिया को महसूस करने लगता है। और तब वह ज्योति एक सुरक्षा चक्र सा बनाने लगती है चारों ओर। इसके कुछ समय बाद हल्की ध्वनि सुनाई पड़ने लगती है। जैसे शंख की, फिर बांसुरी की, और मंदिर के घंटे की। इन सब के बाद वह ज्योतिपुंज हमारी भ्रुकुटी से टकराता है। और तब एक अलौकिक दृश्य दिखाई पड़ता है। यही होती है 'दिव्यदृष्टि'। जिससे हमारे ऋषि मुनि भविष्य देख सकते थे। आत्मा को परमात्मा में लीन करके परमानंद की अनुभूति करते।
8) समाधि - समाधि योग का अंतिम चरण है। इसमें व्यक्ति न देखता है, न सूंघता है, न सुनता है, और ना ही स्पर्श करता है। आज भी हमारे देश में तपस्वी साधु-संत हिमालय की गुफाओं में समाधि लगाए बैठे रहते हैं।
            गुरुदेव श्री रवि शंकर जी ने योग के द्वारा जीवन जीने का आसान मार्ग दिखाया है। समस्त गीता ज्ञान उन्होंने आमजन तक पहुंचाया है।
                     परम पूज्य स्वामी रामदेव ने योग की नई परिभाषा गढ़ी है। उन्होंने न केवल योग सिखाया, अपितु करके भी दिखाया। स्थान-स्थान पर जाकर शिविर लगाए हैं। सभी प्रकार के प्राणायाम- उज्जाई, कपालभाति, भस्त्रिका, अनुलोम -विलोम, उद्गीथ आदि सभी को करना सिखाया और उनके फायदे भी बताए हैं। विभिन्न प्रकार के आसन जैसे सूर्य नमस्कार, वृक्षासन, भुजंगासन, धनुरासन, पवनमुक्तासन, पश्चिमोत्तानासन, ताड़ासन, मयूरासन, नौकासन, वज्रासन आदि के बारे में विस्तृत ज्ञान दिया है। 
               उनके इस महान परोपकार से हमारे देश का और दुनिया का भला हो रहा है। रोगी निरोग हो रहे हैं। जीवन शैली स्वस्थ, शुद्ध, सात्विक हो रही है। देश आयुर्वेद की ओर लौट रहा है। यह बात बिल्कुल सच है कि योग किसी धर्म विशेष से नहीं जोड़ा जा सकता। प्रत्येक व्यक्ति को इसे अपनाना चाहिए। योग एक ऐसी अनुभूति, ऐसी साधना है जो प्रत्येक मनुष्य को सुरक्षित, निरोगी और सच्चे जीवन जीने को प्रेरित करेगी।

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