धानी की हरियाली तीज

"मां मेरे लिए नई चूड़ियां और नए कपड़े ला दो ना।" हरियाली तीज आने पर धानी ने मां से जिद की। धानी अगली बार दिलाऊंगी अबकी पगार नहीं मिली। कोरोना गया ना।
" पिछली बार भी आपने मालकिन की बेटी के कपड़े दिए थे मुझे" धानी रूंआसी होकर बोली।
 मां रानो भी मजबूर थी। इस लॉकडाउन के चलते रानो को घरों में काम नहीं मिल रहा था। कोरोना के डर से लगभग सभी ने मना कर दिया था। एक घर में काम कर रही थी क्योंकि वहां बुजुर्ग दंपति रहते थे। उन्होंने काम करने को मना नहीं किया था।
                       आज हरियाली तीज पर क्या करें रानो। कहां से लाए अपनी बारह साल की बच्ची के लिए नई चूड़ियां और नए कपड़े। इसी उधेड़बुन में काम करे जा रही थी, तभी पीछे से आवाज आई "रानो... रानो।" 
                 रानो ने काम करते-करते ही मुड़ कर देखा.. घर की मालकिन बुजुर्ग महिला के हाथ में एक पैकेट था।
" ले रानो यह पैकेट ले ले। इसमें तेरी बेटी के लिए नया सूट और नई चूड़ियां हैं। आज हरियाली तीज है ना। अब हमारे तो कोई बेटी है नहीं। तेरी बेटी भी तो हमारी बेटी जैसी है।" बुजुर्ग महिला मुस्कुराते हुए बोली। 
रानो निःशब्द नम आंखों से मुस्कुराने लगी।

Comments

Popular posts from this blog

अगर पिज़्ज़ा बर्गर बोलते...

निराशा से आशा की ओर

पहाड़ाँ वाली मां