सावन में दादी के नुस्खे

सावन आते ही अम्मा की नसीहत शुरू हो जाती। सावन में यह करो यह मत करो, बचपन से सुनती आ रही थी यह सब, बड़ी कोफ्त होती थी मुझे। छोटी थी तो इसका भान नहीं था कि बुजुर्गों की कही बात हमारे हित की होती है। प्रत्येक शब्द यथार्थ के अनुभव का परिचय देता है।
                     गांव में अम्मा का बड़ा-सा घर, घर के आंगन में नीम, शहतूत, अनार, तुलसी और कई अन्य औषधीय पेड़-पौधे। सदैव ही अम्मा का लगाव प्रकृति से था। बहुत-सी बीमारियां अम्मा के घरेलू नुस्खों से ही सही हो जातीं। मुझ पर आधुनिकता तथा शहरी वातावरण का प्रभाव था। इसीलिए अम्मा के घरेलू नुस्खे मुझे रास नहीं आते थे। अम्मा मुझे रूढ़ीवादी लगती थीं। उनकी रोक-टोक मुझे अच्छी नहीं लगती थी।
बड़े होने पर एहसास हुआ की अम्मा जो कुछ भी अपने अनुभवों से बताती, परंपरागत ढंग से सभी वैज्ञानिक कसौटी पर खरे उतरे हैं। यह एहसास तब हुआ जब मैं एक बड़ी बीमारी से ग्रसित हो गई। अम्मा ने बताया बचपन में वात, पित्त तथा कफ का संतुलन बिगड़ना नहीं चाहिए पर मैं कहां सुनती!

अम्मा कहती, "सावन में कढ़ी नहीं खाते", तो उसका कारण था कि बरसाती मौसम में पाचन क्रिया कमजोर हो जाती है। वायु रोग बढ़ता है, जोड़ों में दर्द रहने लगता है, इसलिए खट्टे फल, पत्तेदार सब्जियां नहीं खाएं क्योंकि बरसाती मौसम में कीड़े मकोड़े ज्यादा हो जाते हैं। पत्तेदार सब्जियां द्वारा यह हमारे पेट के अंदर चले जाते हैं, जिससे हम बीमार पड़ जाते हैं।
अम्मा कहती, "उड़द की दाल में लहसुन और हींग का ही छौंक लगाओ" कारण है कि उड़द दाल से वायु रोग हो सकता है, जिसका निदान केवल लहसुन और हींग कर सकते हैं।
अम्मा कहती, "कढ़ी और काशीफल की सब्जी में मेथी का ही छौंक लगाओ"  कारण, दोनों सब्जियां वायु कारक हैं। पेट में गैस बना सकती हैं। मेथी में वायु नाशक तत्व होते हैं। जिससे यह खाना पचाने में सहायक होती है।
अम्मा कहती, "सावन में व्रत जरूर रखो" कारण था कि व्रत रखने से पाचन क्रिया मजबूत होती है। व्रत में फलाहार लेते हैं, हलका आहार ऐसे मौसम में स्वस्थ रखता है।
अम्मा कहती, "सावन में सुबह सूरज को जल ज़रूर चढाओ" क्योंकि बारिश के मौसम में धूप कम निकलने पर हमारे अंदर विटामिन-डी की जो कमी हो जाती है, वह सुबह के समय जल देकर पूरी हो जाती है। और सूर्य को 1 मिनट देखना, प्रणाम करने से हमारी नेत्र ज्योति बढ़ जाती है।
अम्मा कहती, "गली नुक्कड़ के चाट-पकोड़े नहीं खाने हैं" कारण, बरसाती मौसम में गली नुक्कड़ के चाट-पकौड़े अनहाइजीनिक हो सकते हैं। इतनी सफाई से नहीं बनाए जाते। मौसम के अनुसार मक्खी-मच्छर भी इन दिनों काफी होते हैं। इनके कारण हम बीमार भी पड़ सकते हैं।
अम्मा कहती, "सावन में ठंडे पेय पदार्थ नहीं पीने हैं" कारण, बदलते मौसम में हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ जाती है। ठंडा पीने से सर्दी जुकाम बुखार जैसे रोग हो सकते हैं।
अम्मा कहती, "सावन में बासी भोजन या ज़्यादा देर पहले पका भोजन नहीं खाना है" कारण, बासी या देर पहले पके भोजन में वायु विकार यानी वादी आ जाती है जो हमारे पेट को खराब कर सकते हैं।
इस तरह से अम्मा के नुस्खे हमारे शरीर को रोगों से बचाते हैं और हम आज भी अम्मा के नुस्खों पर अमल करते हैं।

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