शब्दों की शक्ति
आज मैंने शब्दों की शक्ति की महिमा देखी। मैंने देखा दो समूह आपस में बेहद हिंसात्मक तरीके से लड़ रहे थे। अगले ही पल एक संत आत्मा बुजुर्ग वहां आए और उन्होंने कुछ ऐसा कहा कि दोनों समूह शांत हो गए, और आपस में संतुष्ट हो गए। शब्द क्या नहीं कर सकते! शब्दों में बड़ी ताकत होती है। शब्द विचार हैं, शब्द हमारे विचार में हैं। जैसे हमारे विचार होंगे, हमारे शब्द भी वैसे ही होंगे।
बार-बार संकल्पों को लेकर निराशा के भाव से पीड़ित लोग अक्सर कठोर रणनीति अपना लेते हैं। इस कारण वे स्वयं के शत्रु बन जाते हैं, इसे स्वयं के विकास में बाधा उत्पन्न होती है। ऐसे में इस प्रकार की परिस्थितियों से बचने के लिए हमें कठोर बनने के बजाय, शब्दों का प्रयोग कर लचीला बनना सीखें।
सकारात्मक और रचनात्मक नीति हर विपरीत परिस्थितियों को सहज बना कर हमारी राह आसान बना देती है। यह बेहद कारगर नीति है। सकारात्मक शब्दों की ताकत को आज विश्व के कोने-कोने में महसूस किया जा सकता है।
सकारात्मक सोच की रणनीति में यदि लचीले शब्द भी डाल दिए जाएं तो फिर भंगुर लोहा भी टूट जाता है। ऐसे व्यक्ति को कोई भी आपदा नहीं तोड़ पाएगी। इसलिए अपने शब्दों पर गौर करें। यदि लोग अपने शब्दों से नाराज़ हो जाते हैं, तो इन्हें तुरंत लचीला बनाने का प्रयत्न करें। जिससे आपके बिगड़े काम बन जायेंगे। प्रतिरोध के बजाय खुले दिमाग वाला बनने का प्रयत्न करें।
अक्सर मैंने देखा है कि अनेक विवाद केवल शब्दों के हेरफेर से ही पनपते हैं, और हैरानी की बात यह है कि विवादों का अंत भी केवल समझदारी भरे शब्दों से ही किया जा सकता है। ऐसे समझदारी वाले शब्दों का प्रयोग करने की आदत डालिए। धीरे-धीरे ये नये शब्द कुछ ही समय में आपके व्यक्तित्व और किस्मत को बदल देंगे। और आप एक चमत्कारी व्यक्तित्व बनकर उभरेंगे। तो फिर क्यों ने आज से ही सकारात्मक और लचीले शब्दों का प्रयोग करना शुरू किया जाए, ताकि वे शब्द आपकी दिशा को सही राह पर ले जाएं और आपको शुरू से ही सफलता की ओर बढ़ाएं।
Always think positive to create positive energy
ReplyDeleteGood thought
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