मेरे घर के दो पहरेदार
क्या कभी किसी ने बिना वेतन की पहरेदारी करते देखा है? जो कभी किसी से कुछ भी नहीं लेता। मैंने देखा है, वे दो अंजाने से मेरे घर की न जाने कितने दिनों से पहरेदारी कर रहे हैं। और इन्हें आम भाषा में कहा जाता है "स्ट्रीट डॉग"। जिन्हें कोई भाव नहीं देता। जिन्हें खाना देने से भी शान घटती है। जब भी बचा, डाल दिया। और कर दिया उन पर एहसान। बचा कुचा खाकर भी यह हमारे घरों की इस तरह सुरक्षा करते हैं जैसे वह हमारे अपने ही हों। मेरी गली में भी दो कुत्ते हैं, जब भी हमारा कहीं जाना होता है, वह दौड़ते दौड़ते हमारे पास आ जाते हैं और हमें विदाई देते हैं। हम ही क्यों, वे तो पूरी गली के लोगों के साथ समान व्यवहार करते हैं। एक दिन मैंने देखा कि उनमें से एक दरवाजे पर खड़ा है। फिर वह दो पैरों पर बैठ गया। पता नहीं क्या चाहता था। उत्सुकता वश मैंने पूछ लिया "खाना चाहिए, कुछ लाऊं?"। वह तो ठहरा मूक!! क्या कहता। मेरे मन में उसके प्रति संवेदना जागी। मैं अंदर से रोटी लेने गई और उसे दे दी। वह खाकर चला गया। अब वह मेरे घर के बाहर रोज़ सुबह आ जाता और मैं उसे खाना दे देती। दो-तीन दिन बाद दूसरा कुत्ता भी आ गया। अब तो वे दोनों दरवाजे पर आकर दो पैरों से बैठकर ऐसे देखते जैसे कह रहे हो कि हमें तुम्हारे खाना देने का इंतजार रहता है। ऐसा नहीं था कि उन्हें कोई और कुछ नहीं देता था, पर यह दोनों नियम से हमारे घर के दरवाजे पर जरूर आते हैं। अनायास ही एहसास हुआ कि जिन पर हम ध्यान नहीं देते, कब से हमारे घर की सुरक्षा कर रहे हैं। जब हम चैन की नींद सोते हैं तब वे रात को बिना कुछ मांगे हमारी पहरेदारी करते हैं। कोई भी अनजाना शख्स घर में आये, इससे पहले जांच पड़ताल करने लग जाते हैं। उन दोनों का हमारे परिवार से और मेरे परिवार को उन दोनों से एक मानसिक लगाव हो गया है। जब भी वे दरवाजे पर नहीं आते तो हम सब दूध ब्रेड लेकर उन्हें आवाज लगाते हैं। जिससे वे जल्दी से हमारा खाना खा लें।
बिन झोली के फकीर हैं ये, इनके लिए जरूर खाना व आश्रय देना चाहिए। चलो आज से ही प्रण लें कि अपने आस-पास कोई स्ट्रीट डाॅग भूखा ना रहे।
Very heart touching story. I think this is one of the natural emotions which have been drowned somewhere and now this is the time to be awaken....thanks for the great learning too!
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